Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
आकाशं बाह्यशून्यत्वादनाकाशं तु चित्त्वतः ।
अतीन्द्रियत्वान्नो किंचित्स एवाणुरनन्तकः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
किमाकाशमनाकाशम्* इत्यादि प्रश्न का समाधान करते है ।
वही अनन्त चिदणु परमात्मा बाह्यशून्य होने के कारण आकाशस्वरूप है ओर चेतनरूप
होने के कारण अनाकाशरूप (अशून्यस्वरूप) है । (“न किंचत्किचिदेव किम्“ इस प्रश्न का
समाधान करते हैँ) अतीन्द्रिय होने के कारण वही अनन्त परमाणु कुछ नहीं हे यानी लौकिक
दृष्टि से अप्रसिद्ध है