Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
यावत्कटकसंवित्तिस्तावन्नास्तीव हेमता ।
यावच्च दृश्यतापत्तिस्तावन्नास्तीव सा कला ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि वही दृश्यस्वरूप है, तो दृश्य हेय है, ऐसा कैसे कहते हो ? इस शंका पर कहते है ।
जब तक कटक-प्रतीति रहती है, तब तक स्वर्णता नहीं -सी रहती है, जब तक दृश्यता
की प्रतीति रहती है, तबतक वह वास्तविक चिदेकरसता नहीं -सी रहती है, ओर दुश्यरूप से
परमपुरुषार्थता उसमें है नहीं, इसलिए दृश्यता हेय कही गई है