Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 47
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 47 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
प्रत्यक्षमक्षसारत्वादप्रत्यक्षं ततोऽतिगम् ।
दृश्यत्वेनैष वोदेति चेता द्रष्टैव सद्वपुः ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
कौन प्रत्यक्ष है ओर असद्भूप है, इस प्रश्न उत्तर कहते हैं।
इन्द्रियों का सार यानी अपने कर्म मे सामर्थ्य देनेवाला तत्त्व है, अत: प्रत्यक्ष है और इन्द्रियों
से उसका प्रत्यक्ष नहीं हो सकता, अतः अप्रत्यक्ष यानी असद्रूप है अथवा प्रत्यक्ष आदि प्रमाणो
से ज्ञेय दुश्य में आरोप से इसका उदय होने के कारण यह प्रत्यक्ष है, ऐसा कहते हैँ । दृश्य होने
के कारण इसका उदय होता है, इसलिए यह चेता द्रष्टा प्रत्यक्ष हे