Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
लतागुल्माङ्कुरादीनामनक्षाणां च पोषकः ।
उत्सेधवेदनाकारः प्रकाशोऽनुभवात्मकः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
लता गुल्म आदिका, जो कि जन्मान्ध हैं और अन्यान्य जीवो का भी कौन उत्तम आलोक
है, इस प्रश्न का उत्तर कहते है ।
लता, आडी, अंकुर आदिका, जो कि इन्द्रियरहित हैं, अपने सन्निधानमात्र से पालन
करनेवाला उनकी ऊँचाई ओर उनके फलों का साक्षी अनुभवात्मा प्रकाश ही उनका प्रकाशक
है