Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
सोऽहं भवानेव भवान्संपन्नोऽद्वैतवेदनात् ।
स भवान्न भवेन्नाहं जातो बोधबृहद्वपुः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं
अद्वैतज्ञान से आत्मस्वरूप ही होकर त्वदात्मा (आपका स्वरूप) हो गया हूँ ओर तुम भी
आत्मस्वरूप से मदात्मा (मेरे स्वरूप) बन गये हो । यह सब अहन्ता ओर भवता के प्रतिसन्धान
की व्यवहारदशा में होता है । परमार्थदशा में तो वह आत्मा न त्वद्रूप है या न मद्रूप है, किन्तु
बोधरूप बृहद्शरीरवाला ही है