Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 79, Verses 3–12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 79, verses 3–12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 3-12
संस्कृत श्लोक
किमाकाशमनाकाशं न किंचित्किंचिदेव किम् ।
कोऽहमेवासि संपन्नः को भवानप्यहं स्थितः ॥ ३ ॥
गच्छन्न गच्छति च कः कोऽतिष्ठन्नपि तिष्ठति ।
कश्चेतनोऽपि पाषाणः कश्चिद्व्योम्नि विचित्रकृत् ॥ ४ ॥
वह्नितामजहच्चैव कश्च वह्निरदाहकः ।
अवह्नेर्जायते वह्निः कस्माद्राजन्निरन्तरम् ॥ ५ ॥
अचन्द्रार्काग्नितारोऽपि कोऽविनाशः प्रकाशकः ।
अनेत्रलभ्यात्कस्माच्च प्रकाशः संप्रवर्तते ॥ ६ ॥
लतागुल्माङ्कुरादीनां जात्यन्धानां तथैव च ।
अन्येषामप्यनक्षाणामालोकः क इवोत्तमः ॥ ७ ॥
जनकः कोऽम्बरादीनां सत्तायाः कः स्वभावदः ।
को जगद्रत्नकोशः स्यात्कस्य कोशो मणेर्जगत् ॥ ८ ॥
कोऽणुस्तमःप्रकाशः स्यात्कोऽणुरस्ति च नास्ति च ।
कोऽणुर्दूरेऽप्यदूरे च कोऽणुरेव महागिरिः ॥ ९ ॥
निमेष एव कः कल्पः कः कल्पोऽपि निमेषकः ।
किं प्रत्यक्षमसद्रूपं किं चेतनमचेतनम् ॥ १० ॥
कश्च वायुरवायुश्च कः शब्दोऽशब्द एव कः ।
कः सर्वं न च किंचिच्च कोऽहं नाहं च किं भवेत् ॥ ११ ॥
किं प्रयत्नशतप्राप्यं लब्ध्वापि बहुजन्मनि ।
लब्धं न किंचिद्भवति किंतु सर्वं न लभ्यते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
कौन वस्तु
आकाशरूप (शून्य) ओर अनाकाशरूप (अशून्य) है ? लौकिक पुरुषों की दृष्टि में जो कुछ
नहीं है और तत्त्वज्ञोंकी दृष्टि में कुछ है, ऐसी कोन वस्तु हे ? कौन मैं हूँ और कौन अहंरूप से
स्थित तुम हो ? कौन न चलता हुआ भी चलता है, कौन स्थित न होता हुआ भी स्थित होता
है ? कौन चेतन होता हुआ भी पाषाण के समान अचेतन है ? कौन आकाश में दृश्यरूप
आश्चर्यजनक चित्र को बनाता है ? अग्नि का त्याग न करता हुआ ही कौन अदाहक अग्नि है ?
अग्नि भिन्न किससे निरन्तर अग्नि उत्पन्न होती है ? हे राजन्, चन्द्रमा, सूर्य, अग्नि और
ताराओं से भिन्न होता भी कौन अविनाशी प्रकाशक है ? नेत्रगोचर न होनेवाले किससे प्रकाश
होता है ? जन्मान्ध लता, पेड, आडी, अंकुर आदि का और जिनकी इन्द्र्यो आविर्भूत नहीं
हुई हैं, ऐसे अन्यान्य पदार्थो का कोन उत्तम आलोक है ? आकाश आदिका कौन उत्पादक
है ? ओर सत्ता को सत्ता प्रदान करनेवाला कोन है ? कौन जगद्रूप रत्न का कोष है ओर जगत्
किस मणिका कोश है ? कौन अणु तम का प्रकाशक है ओर किस अणु का ज्ञानियों की दृष्टि
से अस्तित्व होते हुए भी अज्ञोंकी दृष्टि से अभाव हे ? कौन अणु दूर में होता हुआ भी समीप में
हे ? कोन अणु होता हुआ भी निमेष हे ? कौन प्रत्यक्ष होता हुआ भी अज्ञं की दृष्टि से असद्रूप
हे ? कोन चेतन होता हुआ भी अचेतन है ? कोन वायु होता हुआ भी वायु से भिन्न है ? कौन
शब्द होता हुआ भी शब्दभिन्न है ? कौन सब है ओर कुछ भी नहीं है ? कोन अहं होकर भी अहं
नहीं है पहले अनेक जन्मों मेँ अपनी आत्मा के रूप से प्राप्त होकर भी कौन अज्ञान से
आवृत्त होने के कारण अलभ्य प्राय होने से सैकड़ों प्रयत्नो से प्राप्त होने योग्य है ? जो अज्ञं
को कुछ प्राप्त नहीं होता और ज्ञानियों को पूर्ण रूप से प्राप्त होता हे