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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 78, Verses 41–42

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 78, verses 41–42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 41,42

संस्कृत श्लोक

प्रभुत्वं समदृष्टित्वं तच्च स्याद्राजविद्यया । तामेव यो न जानाति नासौ मन्त्री न सोऽधिपः ॥ ४१ ॥ भवन्तौ तद्विदौ साधू यदि तच्छ्रेय आप्नुथः । नो चेदनर्थदौ स्वस्याः प्रकृतेरद्म्यहं युवाम् ॥ ४२ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रभुता और समदृष्टिता राजविद्या से प्राप्त होते हैं, उस राजविद्याको जो नहीं जानता है, वह न तो मन्त्रि है और न राजा है यदि आप लोग अध्यात्मज्ञानी हैं, तब तो अच्छा है और आप लोग उत्तम कल्याण को प्राप्त होंगे। यदि आप लोग अध्यात्मज्ञानी नहीं हैं। तो आप प्रजाओं के भी अकल्याणकारी हैं, इसलिए अपनी प्रकृति के अनुसार मैं तुम लोगों को खा जाऊँगी