Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, Verses 14–15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, verses 14–15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 14,15
संस्कृत श्लोक
श्रुत्वेत्यनुगृऽहीतास्मि त्वयेत्युक्तवती शनैः ।
उत्तस्थौ शैलशिखरात्क्रमादवरुरोह च ॥ १४ ॥
अधित्यकामतीत्याशु गत्वा चोपत्यकातटान् ।
विवेश शैलपादस्थं किरातजनमण्डलम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
वायु के वचन को सुनकर “आपने मेरे ऊपर अनुग्रह किया ।* - यह कहकर वह धीरे
से उठी ओर पर्वतशिखर से क्रमशः नीचे उतरने लगी । पर्वत की ऊर्ध्वभूमि का शीघ्र
उल्लंघन कर ओर पर्वत की समीपस्थ भूमि के तट मेँ जाकर हिमालय पर्वत के अधोभाग
में स्थित किरातों के मण्डल में पहुँची