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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, Verses 12–13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 12,13

संस्कृत श्लोक

गच्छ कर्कटि मूढांस्त्वं ज्ञानेनाश्ववबोधय । मूढोत्तारणमेवेह स्वभावो महतामिति ॥ १२ ॥ बोध्यमानो भवत्यापि यो न बोधमुपैष्यति । स्वनाशायैव जातोऽसौ न्याय्यो ग्रासो भवेत्तव ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे कर्कटी, तुम मूढ (अज्ञानी) लोगों के पास जाओ ओर ज्ञान से उन्हें शीघ्र उद्बुद्ध करो, अज्ञानियों का उद्धार करना ही महान्‌ पुरुषों का एकमात्र स्वभाव हे । जो पुरूष तुम्हारे द्वारा बोध को प्राप्त कराया जाता हुआ भी बोध को प्राप्त नहीं होगा, अपने विनाश के लिए ही उत्पन्न हुआ वह तुम्हारा न्यायोचित ग्रास होगा