Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
विदितपरमकारणाद्य जाता स्वयमनुचेतनसंविदं विचार्य ।
स्वमननकलनानुसार एकस्त्विह हि गुरुः परमो न राघवान्यः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, प्रत्यगूज्ञान का स्वयं ही विचार करके जिसने परम कारण ब्रह्मका साक्षात्कार कर
लिया था, ऐसी वह सूची आज प्रबुद्ध हो गई । अपनी युक्तियों से विचार द्वारा आत्मपरिचय
का अनुसरण करना ही एकमात्र मुख्य गुरु है, अन्य गुरु मुख्य नहीं हे । यद्यपि “आचार्यवान्
पुरूषो वेद” इत्यादि श्रुति हे, तथापि वह “दृश्यते त्वग्रयया बुद्धया" इत्यादि अन्य श्रुति के
अनुसार शिष्यप्रज्ञा का ही अनुसरण करती हे