Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 74, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
गतास्तेन त्रिकोणेन त्रिवर्णपरिखावता ।
वायवः पांसवो येऽपि ते परां मुक्तिमागताः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
सूखने के
कारण अदृश्य, श्यामा, शुक्ला-इन तीन वर्णोवाली सूचीरूपी सरिता से परिवेष्टित जो वहाँ
पर वायु, धूली-कण आदि थे, वे भी परम मुक्ति को -अपने साथ संसर्ग करनेवाले प्राणियों
को मुक्तिरूप फल देनेवाली या दोषों से मुक्त करनेवाली पवित्रता को-प्राप्त हो गये