Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 45
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verse 45 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
न ह्यमूर्तस्य सिध्यन्ति विनाधारं किल क्रियाः ।
इत्याधारैकनिष्ठत्वमाश्रित्यासौ तपःस्थिता ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
अमूर्त पदार्थ की किसी
आधार के बिना तपस्या आदि क्रियाएँ सिद्ध नहीं हो सकती, यह विचार कर वह जीवसूची
लोहसूचीरूपी आधार में एकनिष्ठ होकर तपस्या करने के लिए प्रस्तुत हुई