Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
बहिरन्तश्च वायूनामेकत्वमनुजातया ।
गन्धलेखिकयेवान्तः स्थितं दुर्बलया तथा ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
बाहर उनचास
वायुओं के स्तरों में और भीतर प्राणवायुओं मेँ एकता को प्राप्त हुई अतएव वायु की गति
से विवश हुई वह जैसे वायुओं के अन्दर सुगन्धि रहती है, वैसे ही उनके भीतर स्थित
रही