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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 71, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

मामवान्तरनिर्मग्नां सूक्ष्मां कीटतनोरपि । उद्धरिष्यति को नाम पांसुराशिभिरावृताम् ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

कीड़े के शरीर से भी सूक्ष्म, अवान्तर में (मार्ग में) भाग्यवश धूली में डूबी हुई और धूलिराशि से आवृत्त मेरा कौन उद्धार करेगा ? मुझे देखना ही मुश्किल है, इसलिए मेरा कोई उद्धार करनेवाला नहीं है