Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
रत्नसूचीव मसृणा मनोमननसंयुता ।
वैदूर्यरश्मिलेखेव भानुसंतानसुन्दरी ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
मन के मनन से (भावना से) युक्त यह
सूची सूर्यकिरणों के भीतर में प्रवेश करने से सुन्दर रत्नसूचे के समान और वैदूर्यमणि की
किरणलेखा के समान चिकनी दिखाई देती थी