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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 64

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 64

संस्कृत श्लोक

तीक्ष्णाप्यहृदयत्वेन सरसेष्वरसेष्ववित् । सूत्रितापि पदार्थेषु विशत्यरसगामिनी ॥ ६४ ॥

हिन्दी अर्थ

सूत में पिरोई गई तीक्ष्ण भी वह सूची सरस ओर निरस सभी पदार्थो में हृदयशून्यतावश विशेष का अवधारण न करती हुई अतएव रसास्वाद से रहित होकर सूचीस्वभाव से ही घुसती है