Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
संचार्यमाणवेधेन धावन्तीवाक्षिपातने ।
अदर्शितमुखा एव दुर्जना मर्मवेधिनः ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए वस्त्रो में दर्जी
द्वारा वेधपूर्वक चलाई जा रही वह उनके नेत्रके सामने अपने मुख को वस्त्र में छिपाकर दौडती-
सी देखी जाती हे । पिशुन (चुगलीखोर), चोर आदि दुर्जन लोग अपने मुखको दिखाये विना
ही परमर्मभेदी होते हैँ, अतः उसने भी यह जो काम किया, वह दुष्टोंका-सा ही है