Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
संचारयति वस्त्रेषु सूत्रं चतुरवेधनात् ।
आदीर्घवासनातन्तुः शरीरेष्विव चेतनाम् ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव केवल सूची के स्वभाव से होनेवाले कार्यो को भी वह करती ही है, इस प्रकार के
पूर्वोक्त अर्थको दृष्टान्तपूर्वक कहते हैं ।
जैसे पुत्र, कलत्र आदि में दीर्घ वासनारूप तन्तु मरण के समय में उद्बुद्ध होकर तत्-तत्
वासना के अनुसार स्त्री आदि शरीरों में जीवचेतना को संचारित करता है, वैसे ही यह सूची भी
निपुण वेधन से तत्-तत् वस्त्रो मे सूत्र को संचारित करती है