Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
मुखेन सूक्ष्मसूत्रान्तं चरन्तीव परोम्भितम् ।
परपूरोद्यमेनाशु जातेव हृदयान्विता ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
दूसरों के द्वारा गुँथे गये महीन तागे को अपने मुँह से खाती हुई-सी अतएव दूसरे लोगों के
द्वारा प्राप्त कराये गये उदरपूर्ति के उद्यम से वह मानों स्वस्थ हृदय हुई