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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

नियतेन्द्रियशक्तिः सा जीवेनैव बहिःस्थिता । बौद्धतार्किकविज्ञानसंतानवदलक्षिता ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

उसकी चक्षु आदि इन्द्रियशक्तियाँ प्रत्येक नियत स्थान में स्थित थी, मानों उसका लिंगदेह ही बाहर सूची के आकार में स्थित था । जैसे ज्ञानियों का आलयविज्ञानसन्तान स्वमात्रगोचर होता हुआ भी अन्य से अलक्ष्य रहता है, ओर जैसे तार्किकं का धारावाहिक ज्ञानसन्तान, साक्षीका स्वीकार न होने से अलक्षित रहता हे, वैसे ही वह भी दूसरों से अलक्षित थी