Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
बाला अपि वदन्त्येतद्यदि चेतनमात्रकम् ।
जगदित्येव केवात्र नाम स्यादुपदेशता ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
चिन्मात्र का (चेतनाश्रय) विश्व यह अर्थ होता है । वह लोकमें सबको भलीभाँति विदित
है और वही पुरुषार्थ प्राप्त करानेवाला है, ऐसी अवस्था में उसके उपदेश की कोई आवश्यकता
नहीं है, ऐसा समझ रहे लोगों के अभिप्राय को प्रकट करते हुए श्रीरामचन्द्रजी ने शंका की ।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : जब बालक भी यह जगत् चेतनमात्र है, ऐसा कहते हैं, तो इस
विषय में उपदेश की क्या आवश्यकता रही ?