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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

जगन्नाम्नोऽस्य दृश्यस्य स्वसत्तासंभवं विना । बुध्यते परमं तत्त्वं न कदाचन केनचित् ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

शंका - जव द्वैत का प्रतिबिम्ब नहीं पडता उस अवस्थामे उक्त बुद्धिमें ब्रह्म का प्रतिबिम्ब पड़े । समाधान - नहीं, जैसे दर्पण कभी भी किसी-न-किसी प्रतिबिम्बका ग्रहण किये बिना नहीं रहता, वैसे ही बुद्धि द्वैतप्रतिबिम्बके ग्रहण के बिना नहीं रह सकती; ऐसी अवस्था में द्वैतप्रतिबिम्ब के रहते उसमें अद्वैत का प्रतिबिम्ब नहीं पड़ सकता । वत्स श्रीरामजी, जब तक जगत्‌-नामक इस दुश्यका मिथ्यात्व सिद्ध न हो जाय, तब तक परमतत्त्व को (ब्रह्म को) कभी कोई नहीं जान सकता