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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 63

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 63

संस्कृत श्लोक

एवमेव स जीवात्मा स्वप्नात्मा समुपस्थितः । पितामहत्वमुच्छूनं पश्यन्नात्मनि कालतः ॥ ६३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार श्रीरामचन्द्रजी की मध्यपाती शंका का मखौल से ही समाधान कर “अनाख्येययम्‌” यहाँ तक जो बात कही थी, उसी के अनुसार आतिवाहिक देहों की समष्टिसे उपहित हिरण्यगर्भ में पितामहत्व की कल्पना करते हैं। इस प्रकार समष्ट्यात्मा जीवात्मा यानी हिरण्यगर्भ समय पाकर अपने में उन्नति को प्राप्त हुए पितामहत्व का अनुभव करता हुआ उपासना के परिपाक से फलीभूत उपास्यरूप से स्थित होता हे