Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 61

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 61

संस्कृत श्लोक

सार्थैवानर्थिकाऽकालमाला विलसिता यथा । तथैवाऽकालमिज्जन्तौ सर्वं काले हि शोभते ॥ ६१ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे अत्यन्त शोभायमान भी अकाल-पुष्पमाला तत्काल में उपभोग सुख देने के कारण सार्थक भी क्यों न हो, तथापि ओत्पातिक अनर्थो की जननी होने के कारण लोगों को हर्षित नहीं कर सकती, अतः वह अनर्थकारिणी ही है, वैसे ही परिपाकदशा को (सिद्धदशा को) जो जीव प्राप्त न हो, उसके विषय में अकालोत्पन्न उक्ति अनर्थकारिणी ही होती है। पूर्व श्लोक में जो बात अर्थान्तरन्यास से सिद्ध की गई थी, वह इस श्लोक में उपमा द्वारा सिद्ध की गई है