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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । सिद्धान्तकाल एवैष प्रश्नस्ते राम राजते । अकालपुष्पमाला हि शोभनापि न शोभते ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

क्या यह प्रश्न तात्विक वस्तु को जानकर किया गया है अथवा बिना जाने । यदि जानकर किया गया है, तो विचार की अनर्थकता से हमे कोई आपत्ति नहीं है, यदि बिना जाने किया गया है तो इस प्रश्न का अवसर ही नहीं है, इस आशय से श्रीवसिष्ठजी समाधान करते है । श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रामचन्द्रजी, सिद्धान्तकाल में ही आपका यह प्रश्न सुशोभित हो सकता हे । अकाल में उत्पन्न फूलों की माला कितनी भी सुन्दर क्यो न हो, शोभा नहीं देती । क्योंक उससे उत्पातजनित अनर्थो की आशंका से भय होता है