Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
एवं भावमयैः सत्ताप्रकटीकरणक्षमम् ।
भविष्यदिन्द्रियाख्यं स रन्ध्रं पश्यति देहके ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार उक्त ओर अनुक्त भावमय इन्द्रियों से भावमय देह
में बाह्य पदार्थोकी सत्ता को प्रकट करने में समर्थ भावी इन्द्रियनामक छिद्र को देखता
है