Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
एवं स्थिते मुनिश्रेष्ठ दैवं नाम किमुच्यते ।
किमुच्यते तथा कर्म कारणं च किमुच्यते ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीसे मेरे प्रश्न के अवशिष्ट अंशका भी उत्तर हो चुका, यों सोच रहे श्रीरामचन्द्रजी उक्त
जीवके जन्म-मृत्यु आदि के हेतु दैव, कर्म आदि को वस्तुतः जानने के लिए पूछते हैं ।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिश्रेष्ठ, आपके कथनानुसार जीवके स्वरूप के हृदय में
प्रतिष्ठित होने पर मैं आपसे पूछता हूँ कि दैव किसको कहते हैं, कर्म किसे कहते हैं तथा कारण
क्या कहा जाता है ?