Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
तन्मात्रकल्पना पूर्वं तनोतीदं जगन्मनः ।
असत्यं सत्यसंकाशं गन्धर्वनगरं यथा ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें संकल्पप्रधान मन पहले शब्द आदि सूक्ष्म थूतों की (तन्मात्राओं की) कल्पना कर
जगत् की कल्पना करता है, ऐसा कहते हैं ।
मन पहले भूततन्मात्राओं की कल्पना करता है, तदनन्दर इस जगत् का विस्तार करता
है, जो कि गन्धर्वनगर के तुल्य असत्य होता हुआ भी सत्य-सा प्रतीत होता है