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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

चित्संवित्त्योच्यते जीवः संकल्पात्स मनो भवेत् । बुद्धिश्चित्तमहंकारो मायेत्याद्यभिधं ततः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

जिन उपाधियों से जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार आदि शब्दों का भेद है, उनको कहते हैं । वह चिति ही चिदाभास से जीव, संकल्प करने से मन, निश्चय करने से बुद्धि, स्मरण करने से चित्त, अभिमान करने से अहंकार तथा विक्षेपशक्तियुक्त होने से माया कहलाती है