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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

पत्रमात्रादृते नान्यत्कदल्या विद्यते यथा । भ्रममात्रादृते नान्यज्जगतो विद्यते तथा ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे केले के वृक्ष में पत्तों को छोड़कर और कुछ भी नहीं रहता, वैसे ही जगत्‌ में भी केवल भ्रम को छोड़कर और कुछ नहीं रहता