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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

चिद्धनेनैकतामेत्य यदा तिष्ठति निश्चलः । शाम्यन्व्यवहरन्वापि तदा संशान्त उच्यते ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

पुरूष जीवन्मुक्त कब होता है, इस शंका पर कहते हैं। जब पुरूष चिद्घन परमात्मा से एकता को प्राप्त होकर निश्चल रहता है, चाहे वह समाधिम लीन हो चाहे व्यवहार करता हो, तब संशान्त कहा जाता है