Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
जीवोऽहंकृतिमादत्ते संकल्पकलयेद्धया ।
स्वयैतया घनतया नीलिमानमिवाम्बरम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आकाश अपनी निबिड़ता से (घनतासे) नीलिमा को प्राप्त होता है, वैसे
ही अपने पूर्व संकल्प के संस्कार से जाग्रत हुई अपने में अध्यस्त इस इन्द्रनील शिला के सदृश
निबिड़ता से जीव अहंकार को ग्रहण करता हे