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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

आदिसर्गे हि नियतिर्भाववैचित्र्यमक्षयम् । अनेनेत्थं सदा भाव्यमिति संपद्यते परम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

वह महानियति कबसे है और कैसे उसका रूप है ? इस पर कहते हैं। सृष्टि के आदि में (अग्नि) आदि को इस प्रकार से (उष्णता, ऊर्ध्वज्वलन आदि स्वभाव से) सदा रहना चाहिए यों परमात्मा ही स्वयं संकल्पात्मवृत्तिरूप पदार्थवैचित्रय को अप्रतिहतरूप से प्राप्त होता है, वही नियति है