Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
नरेण पौरुषेणैव कार्ये सत्तात्मके उभे ।
ईदृश्येतेन नियतिरेवं नियतिपौरुषे ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
मनुष्य
को अपने पौरुष से ही नियति सत्ता ओर पुरुषअदृष्ट सम्बन्धिनी सत्ता दोनों सत्ताओं को
बनाना चाहिए । नियति ओर पौरुष भी इसी प्रकार प्राणी के अदृष्ट से निर्वाह्य हैं, इस क्रम से
इस प्रकार की नियति स्थित हे