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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

तत्सत्यं चिद्विलासत्वान्नित्यानुभवरूपतः । तदसत्यं मनः षष्ठात्सर्वाख्या निगतं यतः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

जगत्‌ भी यदि शास्त्रीय चिदृविलासरूप दृष्टि से देखा जाय, तो परमार्थ सत्य ब्रह्म ही है । ब्रह्म भी यदि बहिर्मुख चश्च आदि और मन से उत्पन्न वृत्ति से देखा जाय, तो असत्य जगत्‌ ही है ऐसा कहते हैं । यदि जगत्‌ परमार्थदृष्टि से देखा जाय, तो चिद्‌ का विलास होने से तथा चित्यानुभवरूप होने से वह सत्य ही है । यदि ब्रह्म भी मन से संयुक्त ज्ञानेन्द्रियों से देखा जाय, तो वह भी असत्य ही है, क्योकि वह सम्पूर्ण नामों को प्राप्त हुआ है । भाव यह है कि वाणी के अगोचर ब्रह्म का वाणी का गोचर वह रूप सत्य नहीं हो सकता