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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 61, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

तदेवं जलतां याति निजसत्तात्मिकां स्वयम् । अन्तःस्थितास्वादलवां सलिलं द्रवतामिव ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

तेजस्ता को प्राप्त हुआ ब्रह्म ही स्वयं निजसत्तात्मक जलत्व को, जिसके अन्दर रसतन्मात्रा स्थित है, ऐसे प्राप्त होता है, जैसे जल स्वयं द्रवता को प्राप्त होता हे