Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
परस्परानुसारेण तथारूपेण संविदः ।
कचितास्ताः प्रजापालप्रजावास्तव्यमन्त्रिणः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके अनुरूप फल देनेवाला भोक्ता के अद्वृष्ट का संयोग भी उसमें हेतु है, ऐसा कहते हैं ।
सबका एकरूप से सम्पादन करनेवाले अदृष्टने इन सब संविदों का राजा प्रजा, नगरवासी
ओर मन्त्रियोका परस्पर के अनुसार स्फुरण किया है