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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

इमं मे भगवन्ब्रूहि संशयं सर्वकोविद । तव पातुं न तृप्तोऽस्मि श्रोत्रपात्रैर्वचोमृतम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवन्‌, कृपा करके आप मेरे इस सन्देह को निवृत्त कीजिये, क्योकि आप सर्वज्ञ हैं। आपके वचनरूपी अमृत कर्णरूपी पात्रों से पीकर मैं तृप्त नहीं होता यानी मुझे उसे पीने की इच्छा बनी रहती है