Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 60, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
शाम्यामीव द्विजश्रेष्ठ निर्वामीव विकल्पयन् ।
एतदाख्यानमाश्चर्यं व्याख्यानं शास्त्रदृष्टिषु ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे द्विजश्रेष्ठ, जगत्ततत्वका
विचार कर रहा मैं उपाधि के शान्त होने से शान्त-सा हो रहा हूँ, नित्य निर्वाणस्वरूप की
प्राप्ति से आनन्दसागर में डूब-सा रहा हूँ, यह आश्चर्यमय लीलोपाख्यान श्रुति द्वारा प्रदर्शित
ज्ञानो में उपवृंहणरूप है यानि श्रुति द्वारा प्राप्त ज्ञान को बढ़ानेवाला है