Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
उन्मीलयामास दृशौ विमलालोलतारके ।
हारिण्यौ सुभगाभोगे चन्द्रार्कौ भुवनं यथा ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
निर्मल चंचल तारिकावाले
अपने सुन्दर नेत्रों को उसने यों खोला जैसे भुवन (भुवनात्मा हिरण्यगर्भ विराट्) अपने नेत्ररूपी
चन्द्रमा और सूर्य को उन्मीलित करता है