Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 58, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
स्फुरयामास सोऽङ्गानि रसवन्ति मृदूनि च ।
कनकोज्वलकान्तीनि पल्लवानीव माधवः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वसन्त सुवर्ण
के तुल्य उज्ज्वल कान्तिवाले अपने पल्लवों को संचालित करता है, वैसे ही राजा पद्म ने
अपने हरे भरे (सजीव) कोमल अंगों को संचालित किया