Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 57, Verse 43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 57, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
भगवन्स्वप्नशिखरी प्रबोधे क्वेव गच्छति ।
इति मे संशयं छिन्धि शरदभ्रमिवानिलः ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
दृष्टान्त प्रसंग से श्रीरामचन्द्रजी स्वाप्नविषय का मूलाज्ञान के बाध के बिना आत्यन्तिक
बाघ नहीं है, वह कहाँ छिपकर रहता है, वह स्थान कौन है, ऐसा पूछते हैं।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, वह स्वप्नरूपी पर्वत बोध होने पर कहाँ रहता है, मेरे इस
सन्देह को जैसे वायु शरत्काल के मेघ को नष्ट कर देता है, वैसे ही आप दूर कीजिये