Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 57, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 57, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
तस्यैवाभ्यसतोऽप्येति साधिभौतिकतामतिः ।
यदा शाम्यति सैवास्य तदा पूर्वा प्रवर्तते ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
आतिवाहिक देहके ही
अभ्यास से वह आधिभौतिकता बुद्धि प्राप्त होती है जब आधिभौतिकता बुद्धि शान्त हो
जाती है तब पहले विद्यमान आतिवाहिकता ही रह जाती हे