Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 56, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
ब्रह्मन्प्राप्तः कथमसौ शवस्य निकटं गृहम् ।
कथं तेन परिज्ञातो मार्गो मृतशरीरिणा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
राजा विदूरथ की पत्नी द्वितीय लीला के जीव को उसकी लड़की ने मार्गप्रदर्शन कराया यह
पहले कहा गया है, राजा विदूरथ के जीव को किसने मार्ग दशया यह नहीं कहा । यदि कोर्ड
मार्गपरिदर्शक नहीं था, तो उसे मार्ग का परिज्ञान कैसे हआ ? यह सन्देह होने पर श्रीरामचन्द्रजी
पूछते हैं ।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : ब्रह्मन्, राजा विदूरथ का जीव शव के निकट घर में कैसे पहुँचा ?
उस मृत शरीरवाले को मार्ग का परिज्ञान कैसे हुआ ?