Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 55, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्नेव प्रदेशेऽन्तः पूर्ववत्स्मृतिमान्भवेत् ।
तदैव मृतिमूर्च्छान्ते पश्यत्यन्यशरीरकम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी भ्रम को नये सिरे से क्रमश: कहना आरम्भ करते हैं।
उसी प्रदेश के अन्दर पूर्व जन्म की नाई जब उसे स्मृति होती है तभी (तुरन्त) मरणकाल
की मूर्छा के बाद अन्य शरीर को देखता है