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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 69

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 69 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 69

संस्कृत श्लोक

कोऽद्ययावन्मृतं ब्रूहि चेतनं कस्य किं कथम् । म्रियन्ते देहलक्षाणि चेतनं स्थितमक्षयम् ॥ ६९ ॥

हिन्दी अर्थ

चेतन का मरण सिद्ध नहीं हो सकता, जिसने चेतन का मरण देखा हो, ऐसा कोई साक्षी ही नहीं है, फिर जिसका को साक्षी ही नहीं है, उसकी सिद्धि कैसे हो सकती है ? इतना संसार बीत गया, आजतक चेतन को मरा हुआ किसने देखा ? जरा उसका नाम तो बतलाइये क्या चेतन का मरण विनाश है या दूसरी देह की प्राप्ति है यदि उसका मरण विनाश है, तो वह अपने आप होता है या दूसरे से ? प्रथम पक्ष तो बन नहीं सकता, क्योकि विनाश विरोधी करता है, अपनेमें अपना विरोध कैसे ? दूसरा पक्ष भी नहीं बन सकता, क्योकि असंग चेतना का दूसरे से विनाश हो ही नहीं सकता । यदि चेतनका मरण अन्य देह की प्राप्ति हे, तो वह भी कोई मरण है ? देह तो लाखों मरते हैं और चेतन ज्यों-का-त्यों अविनाशी बना रहता हे