Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
न विशत्येव वातो न निर्याति पवनो यदा ।
शरीरनाडीवैधुर्यान्मृत इत्युच्यते तदा ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
जब
वायु न तो प्रवेश ही करता है ओर न बाहर ही निकलता है, तब शरीर की नाडियों से शून्य
हो जाने के कारण पुरुष मृतक कहलाता है