Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
प्रविष्टा न विनिर्यान्ति गताः संप्रविशन्ति नो ।
यदा वाता विनाडीत्वात्तदा स्पन्दात्स्मृतिर्भवेत् ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
जब नाड़ियों में प्रविष्ट वायु बाहर नहीं आते ओर बाहर निकले हुए वायु उनमें प्रवेश नहीं
करते तब नाडियों के व्यापार के रुकनेपर पुरुष नाड़ी शून्य हो जाता है अतएव चक्षु
आदिका स्पन्दन न होने से स्मरण ही भीतर रहता है, इन्द्रियज्ञान नीं रहता