Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 57
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
श्रीदेव्युवाच ।
एवं संविहितं कर्म सर्गादौ स्पन्दसंविदा ।
यद्यस्मिन्समये दुःखं कालेनैतावतेदृशम् ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीदेवीजी ने कहा : भद्रे ! ईश्वर ने, जिनमें
क्रियाशक्ति की प्रधानता है, इस प्रकार संकल्परूप कर्म का विधान किया है, वह यह कि
इस समय में (बाल्यावस्था में, युवावस्था में, और वृद्धावस्था में) इतने काल तक भोगने
योग्य इस प्रकार का दुःख मुझसे अभिन्न जीवको हो