Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
प्रबुद्धलीलोवाच ।
ते भृत्यास्ताश्च वै दास्यः स राजा च प्रबुद्धवान् ।
वक्ष्यन्ति वदतां देवि किं कयैव कथं धिया ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रबुद्ध लीला ने कहा : हे देवि, वे नौकर-चाकर, वे दासियाँ और वह
राजा उसे कैसे जान पाये ? वे उसे किस बुद्धि से क्या कहते थे और वह बुद्धि कैसे उत्पन्न हो
सकती है यानी वे उसको किस नाते से पुकारते थे और वह नाता कैसे सिद्ध हो सकता है ? यह
सब हमसे किये । भाव यह है कि राजा को यदि अपने पूर्वजन्म के वृत्तान्त का विस्मरण न भी
हुआ हो तो भी अविवाहित स्त्री का ग्रहण शिष्ट पुरूषों द्वारा गर्हित होने के कारण राजा उसका
ग्रहण नहीं कर सकते, यह सब कथा मुझसे आप किये